तमिल फिल्म Soorarai Pottru की हिंदी डब्बड फिल्म उड़ान

तमिल फिल्म Soorarai Pottru की हिंदी डब्बड फिल्म उड़ान

 

तमिल फिल्म Soorarai Pottru की हिंदी डब्बड फिल्म उड़ान आज निपटा दी। फिल्म को जानने से पहले संलग्न फोटो देखिए। यह समूची फिल्म जो कहना चाहती है वो इस फोटो में है। पूरी फिल्म का निचोड़।

गांव के अध्यापक के बेटे नेडुमारन का सपना है कि उसके गांव वाले भी हवाई जहाज में बैठें। मारन को भरोसा है कि वह इसे पूरा करेगा। उसे भरोसा है कि न केवल गांव बल्कि देश के हर उस मामूली इंसान का सपना पूरा करेगा जो हसरत भरी निगाहों से सिर से गुजरते हवाई जहाज को देखकर चमत्कृत होता है और उस चमत्कार का हिस्सा बन कर ताउम्र उसे याद रखता है।

हवाई जहाज में आम लोगों के सफर जिस आदमी ने पहली बार मुमकिन बनाया वो शख्स कैप्टन गोपीनाथ हैं, डेक्कन एयरलाइंस के मालिक। नेडुमारन की कहानी, इनकी कहानी है। यह फिल्म उन्हीं के ख्वाबों को देखने और ख्वाब की तामीर में सामने आने वाली दर्जनों, सैकड़ों, हजारों समस्याओं को धराशायी करते हुए आसमन में उड़ जाने की कहानी है।

मैं सोचता हूं कि जब कोई नौकरीपेशा परिवार बिजनेस की सोचता है तो वह क्या सोचेगा। ढाबा, रेस्टोरेंट, कपड़े की दुकान, कोचिंग, कोई छोटा मोटा कारखाना, बच्चों का स्कूल.. और क्या। लेकिन NDA का अफसर नेडुमारन इस लेवल का आदमी है ही नहीं। उसका ख्वाब है अपनी एयरलाइंस खोलना और हवाई जहाज में लोगों को सफर कराना।

अब सिनेमा है तो इसमें आधी हकीकत और आधा फसाना भी ही। तब भी फिल्म नेडुमारन की असली गलाकाट दिक्कतों से रूबरू कराती है। नेडुमारन के सामने बस एक चीज है और वह है अनगिनत कोशिश और अंत तक कोशिश करना नहीं छोड़ना। इसी खासियत के बल पर वह जैज एयरलाइंस (शायद यह जेट एयरलाइंस होगी रियल लाइफ में) से भिड़ जाता है।

फिल्म गुरू (मणिरत्नम) में नायक अंबानी के सामने जो चुनौतियां हैं, वह उनका सामना तिकड़मों से करता है। ठीक वैसे जैसे स्कै‍म, 1992 (हंसल मेहता) का नायक हर्षद करता है। वह लोगों को अमीर बनाता है, लिफ्टमैन ड्राइवर तक को भी। लेकिन नेडुमारन को तिकड़में नहीं आती। और इसी बिंदु पर इन तिकड़मबाजों से अलग हो जाता है।

उड़ान में प्रतिनायक (परेश राल) वही तर्क इस्तेमाल करता है जिसे हमारे समाज के ऊंचे पायदान पर बैठे लोग आगे बने रहने में करते हैं। वह कहता है – ‘’जानते हो टाटा को एयरलाइंस शुरू करने में 20 साल का इंतजार करना पड़ा था।‘’ यानी जब टाटा को बीस साल लग सकते हैं तो तुम्हारी हैसियत ही क्या है।

नेडुमारन बिजली (electricity) की मिसाल याद रखता है। जब देश में पहली बार बिजली आई थी तो यही कहा गया था कि बिजली पर केवल अमीरों का हक है। वह अपने कंपटीटर और ऐय्याशी के सागर में डूबे विजय माल्या बने पात्र से कहता है आप सोशलाइट हैं और मैं सोशलवर्कर।

बहरहाल फिल्म की रेटिंग 9.1 बताई गई है। ये थोड़ा ज्यादा है। जो चीजें कमर्शियल तमिल सिनेमा में होती हैं, उड़ान उससे पूरी तरह मुक्त नहीं है।

                                                                           ---- Journo Shobhit Jaiswal