ब्लैकमेल रिव्यु: इरफ़ान खान की एक्टिंग, एक बढ़िया प्लाट, लेकिन कमजोर डायरेक्शन

ब्लैकमेल रिव्यु: इरफ़ान खान की एक्टिंग, एक बढ़िया प्लाट, लेकिन कमजोर डायरेक्शन

कास्ट: इरफ़ान खान, कीर्ति कुल्हारी, दिव्या दत्त, अरुणोदय सिंह

निर्देशक: अभिनय देओ

लेखक: परवीज शेख, प्रधुमन सिंह

अवधि: 139 मिनट

जेनर: कॉमेडी, थ्रिलर

प्लोट: टॉयलेट पेपर कंपनी में काम कर रहे देव(इरफ़ान खान) और उसकी पत्नी रीना(कीर्ति कुल्हारी) के बीच अब वो रोमांस नहीं रहा जो शुरुआत में था। इसलिए अपने मैरिज लाइफ को थोड़ा रोमांचक करने के लिए देव वक्त से पहले घर पहुँच जाता है। घर जाकर उसे रीना रणजीत(अरुणोदय सिंह) के साथ दिखती है। जिसके बाद देव रणजीत को पैसे के लिए ब्लैकमेल करता है। बदले में रणजीत रीना को ब्लैकमेल करता है। इन सबके बीच रणजीत की पत्नी डॉली(दिव्या दत्त) भी है जिसके पैसे पर रणजीत मौज करता है, उसे वो इस बात की भनक भी नहीं लगने देना चाहता है। इसी बीच देव के इस ब्लैकमेल की भनक ऑफिस में मौजूद प्रभा(अनुजा साथे) को लग जाती है जो अब इरफ़ान को ब्लैकमेल करती है। इन्ही सब के बीच में आगे जो होता है, वो फिल्म की कहानी है।

रिव्यु: अभिनय देओ को आप कौन से निर्देशक की केटेगरी में रखेंगे ये फैसला कर पाना जरा सा मुश्किल है। ये वही डायरेक्टर हैं जिन्होंने इमरान खान जैसे वुडेन फेस अभिनेता को उनके कैरियर की बेस्ट फिल्म दिल्ली बेली दिए थे, या वो जिन्होंने गेम(आपको तो ये फिल्म याद भी नहीं होगी) जैसी फिल्म दिए थे।

फिल्म की कहानी बेहतरीन है, एक्टिंग भी अच्छी है। इरफ़ान खान ने इस रोल को भी उतने ही बेहतर तरीके से निभाए हैं जैसा उन्होंने अपनी पिछली फिल्मों में निभाया है। उनके अलावा फिल्म के बाकी कलाकारों ने भी बढ़िया काम किया है। लेकिन फिल्म की दिक्कत इसके कई ट्विस्ट-टर्न हैं।

अभिनय देओ की पिछली फिल्म फ़ोर्स 2 के साथ भी यही दिक्कत रही है। सिंपल सी कहानी में उन्होंने इतना कुछ जोड़ दिया था कि फिल्म आखिर तक आते-आते अपने मूल कहानी से भटक गयी थी। वैसा ही कुछ इस फिल्म के साथ देखने को मिला। फिल्म अंत तक आते आते अपने ही कहानी में भटक कर रह गयी।

लेकिन इन सबमें इरफ़ान खान ने अपने अभिनय से फिल्म को संभाले रखा। अफ़सोस है कि वो इस वक्त ट्रीटमेंट से गुजर रहे है। उम्मीद करते हैं कि इरफ़ान खान जल्दी बड़े परदे पर दोबारा अपनी एक्टिंग से हमें जोड़े रख सके।